Sunday, 22 October 2017

अवैध संबंध के शक में पत्नी को मारी गोली

संवाद सहयोगी, जसवंतनगर : अवैध संबंध के शक में पति ने अपनी पत्नी पर गोली चला दी। गोली पेट में ज
संवाद सहयोगी, जसवंतनगर : अवैध संबंध के शक में पति ने अपनी पत्नी पर गोली चला दी। गोली पेट में जा लगी इससे महिला घायल हो गई, उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपी पति मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी उसके बेटे ने पुलिस को बताई है।
घटना बलरई थाना क्षेत्र के ग्राम पीहरपुर की है। राघवेंद्र ¨सह यादव व उसकी पत्नी प्रभा देवी के बीच गुरुवार की शाम को जमकर विवाद हो गया था। राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का अन्य व्यक्ति से नाजायज ताल्लुकात हैं। बात इतनी तूल पकड़ गई कि राघवेंद्र ने लोहे की सरिया से उसकी मारपीट कर दी थी, जिसकी प्रभा ने थाने में रिपोर्ट कर दी। दूसरे दिन शुक्रवार सुबह रिपोर्ट की बात पर गुस्साए राघवेंद्र ने उसको गोली मार दी जिससे वह घायल हो गई। गोली पेट में लगी थी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस घायल महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले गई। जहां पर उसका उपचार चल रहा है। घायल महिला के पुत्र मोहित यादव ने अपने पिता के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। थाना पुलिस प्रभारी रूपे लाल शर्मा ने घटना स्थल पर पहुंचकर पड़ताल की और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
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Wednesday, 18 October 2017

दिवाली की पूजा और क्या है महत्व , दीपावली पूजन की सामग्री

                                                                                   


दिवाली भारत में मनाया जाने वाला हिंदूओं का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया कि अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई और अंधेरा मिट गया उजाला हो गया। इसका ये अर्थ है कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा इसी के कारण दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली का त्योहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। ये एक पंचदिवसीय त्योहार है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्योहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाए जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है।
दीपावली पूजन की सामग्री
कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली। कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन।

पूजन शुरू करने से पहले गणेश लक्ष्मी के विराजने के स्थान पर रंगोली बनाएं। जिस चौकी पर पूजन कर रहे हैं उसके चारों कोने पर एक-एक दीपक जलाएं। इसके बाद प्रतिमा स्थापित करने वाले स्थान पर कच्चे चावल रखें फिर गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा को विराजमान करें। इस दिन लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबेर, सरस्वती एवं काली माता की पूजा का भी विधान है अगर इनकी मूर्ति हो तो उन्हें भी पूजन स्थल पर विराजमान करें। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा के बिना देवी लक्ष्मी की पूजा अधूरी रहती है। इसलिए भगवान विष्ण के बांयी ओर रखकर देवी लक्ष्मी की पूजा करें।

दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए


Monday, 16 October 2017

धनतेरस पूजा की समाग्री और पूजन विधि



                                       


धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और सेहत की रक्षा और आरोग्य के लिए धन्वन्तरी देव की उपासना की जाती है. इस दिन यमराज की भी पूजा होती है. पूरे साल में यह अकेला ऐसा दिन है, जिस दिन यमराज की पूजा की जाती है और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है.
इस दिन विशेष विधि से धनतेरस की पूजा करने वाले लोगों को जीवनभर धन की कमी नहीं होती और मान व सम्मान बना रहता है.
पूजन की सामग्री
21 पूरे कमल बीज, मणि पत्थर के 5 प्रकार, 5 सुपारी, लक्ष्मीगणेश के सिक्के (10 ग्राम या अधिक), अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद, कपूर आदि
पूजन विधि
- संध्याकाल में उत्तर की ओर कुबेर तथा धन्वन्तरी की स्थापना करें.
- दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जलाएं.
- कुबेर को सफेद मिठाई और धन्वन्तरि को पीली मिठाई चढ़ाएं.
- पहले "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें.
- फिर "धन्वन्तरि स्तोत्र" का पाठ करें.
- धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है.
- भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी के दीप जलाएं. धुप जलाकर उनकी पूजा करें. भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं. प्रसाद ग्रहण करें
- पूजा के बाद, दीपावली पर, कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.
यम का दीप भी जलाएं
- घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीपक ना निकालें. दीपक जलाने से पहले उसकी पूजा करें.
- किसी लकड़ी के बेंच पर या जमीन पर तख्त रखकर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनायें.
- फिर एक मिट्टी के चौमुखी दीपक या आटे से बने चौमुखी दीप को उस पर रखें.
- दीप के आसपास तीन बार गंगा जल का छिड़काव करें.
- दीप पर रोली का तिलक लगाएं. उसके बाद तिलक पर चावल रखें.
- दीप पर थोड़े फूल चढ़ाएं.
- दीप में थोड़ी चीनी डालें.
- इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीप में डालें.
- परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं.
- दीप को प्रणाम करें.
- दीप को घर के गेट के पास रखें. उसे दाहिने तरफ रखें और यह सुनिश्चित करें की दीप की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो.
- चूंकि यह दीपक मृत्यु के नियन्त्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो.


दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए


 

Thursday, 12 October 2017

चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत

                                                                            
चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपवली का त्यौहार अमावस की रात में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से जोड़ लेता है और फिर राम से शिकायत करता है और राम भी उस की बात से सहमत हो कर उसे वरदान दे बैठते हैं आइये देखते हैं ।
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जब चाँद का धीरज छूट गया ।
वह रघुनन्दन से रूठ गया ।
बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है ।
स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है ।

तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है ।
हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है ।
सीता के रूप को हम ही ने सँभारा है ।
चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है ।

जिस वक़्त याद में सीता की ,
तुम चुपके - चुपके रोते थे ।
उस वक़्त तुम्हारे संग में बस ,
हम ही जागते होते थे ।

संजीवनी लाऊंगा ,
लखन को बचाऊंगा ,.
हनुमान ने तुम्हे कर तो दिया आश्वश्त
मगर अपनी चांदनी बिखरा कर,
मार्ग मैंने ही किया था प्रशस्त ।
तुमने हनुमान को गले से लगाया ।
मगर हमारा कहीं नाम भी न आया ।

रावण की मृत्यु से मैं भी प्रसन्न था ।
तुम्हारी विजय से प्रफुल्लित मन था ।
मैंने भी आकाश से था पृथ्वी पर झाँका ।
गगन के सितारों को करीने से टांका ।

सभी ने तुम्हारा विजयोत्सव मनाया।
सारे नगर को दुल्हन सा सजाया ।
इस अवसर पर तुमने सभी को बुलाया ।
बताओ मुझे फिर क्यों तुमने भुलाया ।
क्यों तुमने अपना विजयोत्सव
अमावस्या की रात को मनाया ?

अगर तुम अपना उत्सव किसी और दिन मानते ।
आधे अधूरे ही सही हम भी शामिल हो जाते ।
मुझे सताते हैं , चिड़ाते हैं लोग ।
आज भी दिवाली अमावस में ही मनाते हैं लोग ।

तो राम ने कहा, क्यों व्यर्थ में घबराता है ?
जो कुछ खोता है वही तो पाता है ।
जा तुझे अब लोग न सतायेंगे ।
आज से सब तेरा मान ही बढाएंगे ।
जो मुझे राम कहते थे वही ,
आज से रामचंद्र कह कर बुलायेंगे

दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए?,


Sunday, 2 July 2017

देखें, GST लागू होने के साथ ही सस्ती हो गईं ये चीजें


GST से आपकी जेब पर कितना होगा असर?

0% GST
खुला अनाज, ताजी सब्जियां, बिना मार्का आटा, बिना मार्का मैदा, बिना मार्का बेसन, गुड़, दूध, अंडे, दही, लस्सी, खुला पनीर, बिना मार्का नैचुरल शहद, प्रसाद, खजूर का बना गुड़, नमक, काजल, फूल झाड़ू, बच्चों की ड्रॉइंग की किताबें, एजुकेशन सर्विसेस और हेल्थ सर्विसेस पर जीएसटी लागू नहीं होगा।
5% GST
– चीनी, चाय पत्ती, कॉफी के भुने दाने, स्किम्ड दूध पाउडर, बच्चों का मिल्क फूड, पैक्ड पनीर, काजू, किशमिश, पीएसडी केरोसीन, एलपीजी, जूते-चप्पल (500 रुपए तक), कपड़े (1000 रुपए तक), अगरबत्ती, कॉयर मैट, चटाई और फ्लोर कवरिंग जैसी चीजें।
12% GST
मक्खन, घी, बादाम, फ्रूट जूस, पैक्ड नारियल पानी, सब्जी, फल, नट्स, पौधों के पार्ट्स से बने प्रोडक्ट्स जैसे अचार, मुरब्बा, चटनी, जैम और जेली, छाता, मोबाइल जैसी चीजें।
18% GST
हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, साबुन, पास्ता, कॉर्नफ्लैक्स, सूप, आइसक्रीम, टॉयलेट्रीज, कम्प्यूटर, प्रिंटर जैसी चीजें।
28% GST
एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, च्विइंगम, पान मसाला, बीड़ी, फूड बेवरेज, शेविंग क्रीम, शैम्पू, मार्बल, सीमेंट, एल्यूमिनियम के दरवाजे-खिड़कियां, कारें, टू-व्हीलर, रिस्ट वॉच, डिजिटल कैमरा जैसी चीजें।

1. मिल्क पाउडर
2. दही
3.छाछ
4.गैर-ब्रैंडेड शहद
5. डेयरी स्प्रेड
6. पनीर
7. मसाले
8. चाय
9. गेहूं
10. चावल
11. आटा
12. मूंगफली तेल
13. तिल का तेल
14. सूरजमुखी का तेल
15. नारियल तेल
16. सरसों तेल (Mustard oil)
17. शुगर
18. गुड़
19. शुगर कन्फेक्शनरी
20. पास्ता
21. स्पाघेटी
22. मकरोनी
23. नूडल्स
24. फल और सब्जियां
25. अचार
26. मुरब्बा
27. चटनी
28. मिठाइयां
29. केचअप
30. सॉसेज
31. टॉपिंग्स ऐंड स्प्रेड्स
32. इंस्टैंट फूड मिक्स
33. मिनरल वॉटर
34.बर्फ
35. खंडसारी
36. बिस्किट्स
37. रायसिन ऐंड गम
38. बेकिंग पाउडर
39. नकली मक्खन
40. काजू

दैनिक उपयोग के इन प्रॉडक्ट्स के भी दाम हो गए कम

1. नहाने का साबुन
2. हेयर ऑइल
3. डिटर्जेंट पाउडर
4. साबुन
5. टिशू पेपर्स
6. नैपकिन्स
7. माचिस
8. कैंडल्स
9. कोयला
10. केरोसिन
11. घरेलू एलपीजी गैस
12. चम्मच
13. कांटे
14. करछुल
15. स्किमर्स
16. केक सर्वर्स
17. मछली का चाकू
18. चिमटा
19. अगरबत्ती
20. टूथपेस्ट
21. दंतमंजन
22. हेयर ऑइल
23. काजल
24. एलीपीजी स्टोव
25. प्लास्टिक तिरपाल 

 

स्टेशनरी

1. नोटबुक्स
2. पेन
3. सभी तरह के पेपर
4. ग्राफ पेपर
5. स्कूल बैग
6. एक्सरसाइज बुक्स
7. पिक्चर, ड्रॉइंग और कलर बुक्स
8. चर्मपत्र
9. कार्बन पेपर
10. प्रिंटर्स
हेल्थकेयर में इन चीजों के घट गए दाम
1. इन्सुलिन
2. एक्सरे फिल्म्स
3. डायग्नोस्टिक किट्स
4. नजर के चश्मों के लिए ग्लास
5. डायबिटीज और कैंसर की दवाएं

कपड़े और फुटवियर

1. सिल्क
2. वूलन फैब्रिक
3. खादी यार्न
4. गांधी टोपी
5. 500 रुपये से कम के फुटवियर

इन सामानों के भी घट गए दाम

1. 15 हॉर्सपावर से कम के डीजल इंजन
2. ट्रैक्टर के टायर और ट्यूब
3. सिलाई मशीन
4. स्टैटिक कन्वर्टर्स
5. बिजली के ट्रांसफार्मर
6. वाइंडिंग वायर्स
7. हेल्मेट
8. पटाखे
9. ल्यूब्रिकेंट्स
10. बाइक
11.100 रुपये से कम के मूवी टिकट
12. पतंगें
13. लग्जरी कारें
14. मोटरसाइकल
15. स्कूटर्स
16. इकॉनमी क्लास एयर टिकट
17. 7,500 रुपये के टैरिफ वाले होटल
18. सीमेंट


Thursday, 29 June 2017

भारत में अन्नपूर्णा योजना

भारत में अन्नपूर्णा योजना आज एक खास वर्ग के लिए आवश्यक बनती जा रही है, ये खास वर्ग किसी भी जाती, धर्म, आयु, लिंग या स्थान का हो सकता है, जैसा की इसका नाम है, अन्नपूर्णा योजना, तो आप देखेंगे की ये उत्तरी भारत के कुछ राज्यों में ही इस नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारत के अलाबा अन्य राज्यों में भी इस प्रकार के प्रयास किये गए है, परन्तु उनके नाम और काम करने का तरीका कुछ अलग है।
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रेलवे के नए नियम

अगर आप रेलवे में सफर करते हैं तो जरा इस खबर को ध्यान से पढ़ें। अगर आपने इस खबर को मिस कर दिया तो आपको परेशानी हो सकती है। दरअसल 1 जुलाई से रेलवे में कई बदलाव होने वाले हैं। अगर आप ने इस बदलावों के बारे में नहीं जाना तो आपकी मुश्किल बढ़नी तय हैं। जानिए क्या है वो अहम बदलाव
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प्रधान मंत्री आवास योजना की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया

भारत के प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी जी का विचार है की सभी के पास अपना खुद का घर हो, उन्होंने प्रधान मंत्री आवास योजना का शुभारम्भ किया है, इस योजना को अभी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और निम्न आय वर्ग के लोगो के साथ साथ सभी जातियो और धर्मो के लोगो के लिए है, जिनकी वार्षिक आय ३ लाख से कम है को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आएंगे और जिनकी ३ लाख से ६ लाख के बीच है वो निम्न आय वर्ग में जायेगे।
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प्रधान मंत्री मुद्रा योजना – मुद्रा बैंक

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, एक ऐसी योजना है जिसमे भारत देश के नागरिक अपना खुद का व्यवसाय खोलने के लिए बैंक के द्वारा निर्धारित मानको के आधार पर लोन न लेकर प्रधान मंत्री द्वारा दी गयी व्याजदरो पर लोन लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते है, इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने ८ अप्रैल २०१५ को 20 हजार करोड़ रुपए के कॉर्पस फंड और 3,000 करोड़ रुपए के क्रेडिट गारंटी कॉर्पस के साथ इस माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा) बैंक का उद्घाटन किया, इस योजना की जानकारी सबसे पहले भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली जी ने अपने बजट भाषण में दी थी।
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प्रधान मंत्री जन धन योजना क्या है

भारत देश एक बहुत ही विशाल देश है, यहाँ पर १ अरब से ज्यादा लोग निवास करते है, सबकी जरूरते अलग है, विचार अलग है, रहन सहन और खान पान अलग है, भाषा अलग है, परंतु इन सबके बाद भी कुछ बुनियादी जरूरते सबके लिए एक जैसी ही है, जैसे सब रुपये कामना चाहते है, सुखी रहना चाहते है, और रूपये बचाना भी चाहते है, और उनको सुरक्षित भी रखना चाहते है।
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Wednesday, 28 June 2017

प्रधान मंत्री जन धन योजना क्या है

भारत देश एक बहुत ही विशाल देश है, यहाँ पर १ अरब से ज्यादा लोग निवास करते है, सबकी जरूरते अलग है, विचार अलग है, रहन सहन और खान पान अलग है, भाषा अलग है, परंतु इन सबके बाद भी कुछ बुनियादी जरूरते सबके लिए एक जैसी ही है, जैसे सब रुपये कामना चाहते है, सुखी रहना चाहते है, और रूपये बचाना भी चाहते है, और उनको सुरक्षित भी रखना चाहते है।
Read more- प्रधानमंत्रीजनधनयोजना  जनधनयोजनाप्रधानमंत्री  जनधनयोजनामेंखाता

मातृत्व लाभ योजना

मातृत्व लाभ योजना भारत सरकार की देश की गर्भवती महिलाओ को आर्थिक और स्वास्थ लाभ प्रदान करने की एक महत्वकांक्षी योजना है, वैसे इस तरह की योजना भारत के कुछ राज्यो जैसे केरल और तमिलनाडु में पहले से ही चल रही है और यहाँ की जनता को इसका लाभ भी मिल रहा है, परंतु ये सिर्फ राज्य सरकार की पहल है जो की किसी अन्य राज्य में नहीं है, तमिलनाडु में भी कुछ १० साल पहले रामचंद्रन ने अपनी माता की स्मृति में मुथुलक्ष्मी मातृत्व लाभ योजना का प्रारम्भ किया।
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भारत के वर्तमान राष्ट्रपति कौन

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी है, महामहिम इसके पहले भारत सरकार में वित्त मंत्री थे, इसके अलाबा उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल में भारत सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, श्री प्रणव मुखर्जी का जन्म पश्चिम बगल के बीरभूमि जिले के मिरति ग्राम में 11 दिसंबर १९३५ को हुआ था, शादी 1957 में सुव्रा मुख़र्जी से हुयी थी जिनका देहांत 2005 में हो गया था , महामहिम का कार्यकाल 25 जुलाई २०१२ से शुरू हुआ था जो की २०१७ में समाप्त होने वाला है।
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प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना

जब से नरेंद्र मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला है लगातार देशवासियो के स्वास्थ और आर्थिक समृद्धि के लिए प्रयासरत है, इसकी क्रम में उंन्होने सबसे पहले बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उसके बाद सुकन्या समृध्दि योजना और उसके बाद अब प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना लाये है, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना वास्तव में क्या है, क्यों इसको लाया गया और इससे देशवासियो को क्या फायदा है।
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सुकन्या समृद्धि योजना

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ दिन बाद ही सुकन्या समृद्धि योजना का शुभारम्भ किया, हम आप या कोई भी पूछ सकता है की सुकन्या समृद्धि योजना क्या है ? सुकन्या समृद्धि योजना के नियम क्या है ? सुकन्या समृद्धि योजना को लाने का आर्थिक, समाजिक और राजनीतिक मकसद क्या है ? क्या सुकन्या समृद्धि योजना सफल होगी ? क्या सुकन्या समृद्धि योजना को देश की जनता अपनाएगी या फिर क्या हमारे देश का अधिकारी, क्लर्क और बैंक सुकन्या समृद्धि योजना को सफल बनाने में और जनता को सही जानकारी देने का प्रयास करेगे ?
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भारत में उच्च न्यायालय

भारत जैसे विशाल देश में जहां पर न्याय व्यवस्था पर जाती धर्म और लिंग का विशेष प्रभाव पड़ता है, ऐसे देश में सम्पूर्ण देश को एक न्यायिक व्यवस्था में बांध पाना संभव नहीं है, क्युकी न्याय व्यवस्था पर उस भूभाग के वातावरण और जनसमुदाय की आकांशाओ और व्यक्तित्व का विशेष प्रभाव पड़ता है, यही विचार करके देश के ज्यादातर प्रदेश में उच्च न्यायालय की स्थापना की गयी है, देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय कलकत्ता उच्च न्यायालय है जिसकी स्थापना तत्कालीन अंग्रेजी शासको ने एक सर्वोच्च न्यायालय के रूप में की थी और सबसे नवीनतम उच्च न्यायलय त्रिपुरा उच्च न्यायालय है जो की 2013 में बना है।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना

भारत देश के जनसँख्या १ अरब से ज्यादा है, यह देश विभिन्न मतों, जातियो और सम्प्रदाय के लोगो को अपने में समेटे हुए है, भारत में हर जाती के व्यक्ति की बेटियो के लिए अलग मानसिकता है, हर धर्म के लोगो के लिए बेटियो के अलग मानसिकता है, राज्य के अनुसार और फिर जिले, तालुका और गांव के अनुसार लोगो की बेटियो के लिए अलग मानसिकता है।
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Tuesday, 23 May 2017

औरैया का इतिहास

रोहिल्लास के तहत १७६० ई. में अहमद शाह दुर्रानी ने भारत पर आक्रमण किया। उसका पानीपत के मैदान पर मराठों व्दारा १७६१ में विरोध किया गया और उसनें मराठों को एक असाधारण रुप से हार दी। अन्य मराठा सरदारों के अलावा गोविन्द राव पंडित ने भी युद्ध में अपना जीवन खो दिया। भारत से प्रस्थान पूर्व दुर्रानी प्रमुख ने रोहिल्ला सरदारों को देश के बड़े हिस्सों में भेजा। धुंदे खान को शिकोहाबाद, इनायत खांन (हाफीज़ रहमत खान के बेटे) को इटावा मिला जो कि मराठों के कब्जे में था और १७६२ में एक रोहिल्ला सेना मुल्ला मोहसिन खान के नेतृत्व में मराठो से सम्पत्ति हथियाने के लिये भेजी गयी थी। इस सेना का इटावा शहर के निकट किशन राव व बाला राव पंडित, जो यमुना पार की सुरक्षा के लिये प्रतिबद्ध थे, के व्दारा विरोध किया गया। मोहसिन खान व्दारा इटावा के किले की घेराबन्दी की गयी थी लेकिन किलेदार ने जल्द ही आत्मसमर्पण कर दिया और जिला रोहिल्लास के हाथों में चला गया। जमींदारों ने इनायत खान को राजस्व का भुगतान करने से इन्कार कर दिया और अपने किलों में अवज्ञा का अधिकार सुरक्षित कर दिया। शेख कुबेर और मुल्ला बाज़ खान के नेतृत्व में मजबूत सैन्य बल और कुछ तोप खाने रोहिल्लास भेजे गये और बहुत सारे छोटे किले मिट्टी में मिल गये लेकिन इतनी बर्बरता में भी जमुना पार क्षेत्र के कमैत के जमींदार ने इनायत खान के अधिकार का विरोध किया।उसके बाद हाफिज़ रहमत और इनायत खान खुद इटावा आये और जमींदारों के खिलाफ बर्बरतापूर्वक कार्यवाही को तेज किया और अन्ततः वे सन्धि के लिए तैयार हो गये। उसके बाद हाफिज़ रहमत बरेली चले गये और रोहिल्ला चौकियाँ जिले में सुविधाजनक स्थानों पर स्थापित कर दी गयी। इसी बीच एक नए राजा नाजिब खान का दिल्ली में उदय हुआ। नाजिब खान को नाजिब-उद् –दौला, आमिर-उल-उमरा, शुजा उद- दौला के नाम से भी जाना जाता है। नबाब वाजिर ने सफदर जंग में सफलता प्राप्त की और दुर्रानी व्दारा रोहिल्लास की दी गयी जमींन के अलावा बंगश से अलीगढ़ तक की सम्पत्ति पर कब्जा कर लिया लेकिन फर्रुखाबाद के अफगानों को वाजिर की दुश्मनी बर्दाश्त नहीं हुई और १७६२ में उसने फर्रुखाबाद पर हमले में शामिल होने के लिए नाजिब-उद-दौला को मनाया। हमला हाफिज़ रहमत खान की सहायता से जीता गया। १७६६ में मराठों ने एक बार फिर मल्हार राव, जो अपने अवसर का इन्तजार कर रहा था, के नेतृत्व में जमुना पार करके फंफूद पर आक्रमण कर दिया। जहाँ पर मुहम्मद हसन खान, मोहसिन खान के सबसे बड़े पुत्र के नेतृत्व में रोहिल्लास सेना तैनात की गयी थी। इस खबर के मिलने पर हाफिज़ रहमत बरेली से मराठों का सामना करने के लिये आगे बढ़ा। फफूँद के करीब उसको शेख कुबेर, इटावा के रोहिल्ला राज्यपाल का साथ मिला और युद्ध में चुनौती देने का तैयारी शुरु हो गयी। लेकिन मल्हार राव ने जोखिम में शामिल होने से मना कर दिया। और एक बार फिर वह जमुना पार चला गया। महत्वाकांक्षी नाजिब-उद-दौला १७६२ में अहमद खान की तरफ से बांग्ला देश की ओर से रोहिल्लास के हस्तक्षेप से काफी चिढ़ गया था और वह भी बदला लेने के लिये जल्दी से अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगा हुआ था, उसने १७७० में हाफिज़ रहमत खान के पतन की साजिश रचना शुरु कर दिया। नाजिब-उद-दौला और मराठों की संयुक्त सेना दिल्ली से आगे बढ़ी, लेकिन कोइल में नाजिब-उद-दौला बीमार पड़ गया और उसने अपने सबसे बड़े पुत्र जबीता खान को मराठों की सहायता करने के लिये छोड़कर अपने कदम पीछे ले लिये। फिर भी जबीता खान ने ,किसी भी तरह से अपने अफगान भाईयों के खिलाफ युद्ध का निपटारा नहीं किया । यह जानने पर मराठों ने उसे अपने शिविर में ही व्यावहारिक रुप से कैदी बना लिया और उसने हाफिज रहमत खाने से अपनी रिहाई प्राप्त करने के लिये अनुरोध किया। तद्नुसार हाफिज रहमत खान ने जबीता खान की रिहाई के लिये मराठों से वार्ता शुरु की, लेकिन मराठा नेताओं ने अपने मूल्य के रुप में इटावा और शिकाहाबाद के जागीर के आत्मसमर्पण की माँग की। हाफिज रहमत खान उन शर्तों पर निपटारा करने के लिये सहमत नहीं था। और वार्ता के दौरान मराठों से सौदा करने के बीच में जबीता खान बच के भाग निकला। अब मराठों और अफगाँन सेनाओं के बीच में कई अनियमित सन्धियाँ हुई। लेकिन जबकि धुंदे खान शिकोहाबाद देने के लिये तैयार हो गया था, इनायत खान ने इटावा देने से मना कर दिया।
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Monday, 22 May 2017

यमुनानगर का इतिहास

यमुना नगर का इतिहास सही मायने में विभाजन के बाद से ही शुरू होता है, सबसे पहले यमुना नगर तब प्रकाश में आया जब बंटवारे के बाद पाकिस्तान से लोग यहाँ पर आये इसमें कुछ कोलोनिओ को सरकार ने उनके लिए ही आरक्षित कर दिए थे।

थोड़ा और पहले का इतिहास देखते है तो हम पाएंगे की यमुना नगर का पहले नाम अब्दुल्लाहपुर था, इसको बाद में जमनानगर और उसके बाद यमुनानगर कर दिया गया और यही नाम १९४७ तक और उसके बाद भी जाना जाता है।

यमुना नगर के इतिहास में इसके जिले बनाये जाने का समय १९४७ के आसपास ही है, जब बंटवारा हुआ तब यमुना नगर अम्बाला जिले का अंतरगत आता था, परन्तु जब इसके प्रशासनिक कार्यो में दिक्कते आयी तो इसे एक पूर्ण जिला बना दिया गया।
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Thursday, 18 May 2017

History of Agra in Hindi

आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। कहते हैं कि पहले यह नगर आयॅग्रह के नाम से भी जाना जाता था। तौलमी पहला ज्ञात व्यक्ति था जिसने इसे आगरा नाम से संबोधित किया। आगरा मुगल साम्राजय की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे – ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल है। आगरा उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक महानगर, ज़िला शहर व तहसील है। विश्व का अजूबा ताजमहल आगरा की पहचान है और यह यमुना नदी के किनारे बसा है। आगरा उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है।
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