Sunday, 22 October 2017

अवैध संबंध के शक में पत्नी को मारी गोली

संवाद सहयोगी, जसवंतनगर : अवैध संबंध के शक में पति ने अपनी पत्नी पर गोली चला दी। गोली पेट में ज
संवाद सहयोगी, जसवंतनगर : अवैध संबंध के शक में पति ने अपनी पत्नी पर गोली चला दी। गोली पेट में जा लगी इससे महिला घायल हो गई, उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपी पति मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी उसके बेटे ने पुलिस को बताई है।
घटना बलरई थाना क्षेत्र के ग्राम पीहरपुर की है। राघवेंद्र ¨सह यादव व उसकी पत्नी प्रभा देवी के बीच गुरुवार की शाम को जमकर विवाद हो गया था। राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का अन्य व्यक्ति से नाजायज ताल्लुकात हैं। बात इतनी तूल पकड़ गई कि राघवेंद्र ने लोहे की सरिया से उसकी मारपीट कर दी थी, जिसकी प्रभा ने थाने में रिपोर्ट कर दी। दूसरे दिन शुक्रवार सुबह रिपोर्ट की बात पर गुस्साए राघवेंद्र ने उसको गोली मार दी जिससे वह घायल हो गई। गोली पेट में लगी थी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस घायल महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले गई। जहां पर उसका उपचार चल रहा है। घायल महिला के पुत्र मोहित यादव ने अपने पिता के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। थाना पुलिस प्रभारी रूपे लाल शर्मा ने घटना स्थल पर पहुंचकर पड़ताल की और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
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Wednesday, 18 October 2017

दिवाली की पूजा और क्या है महत्व , दीपावली पूजन की सामग्री

                                                                                   


दिवाली भारत में मनाया जाने वाला हिंदूओं का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया कि अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई और अंधेरा मिट गया उजाला हो गया। इसका ये अर्थ है कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा इसी के कारण दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली का त्योहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। ये एक पंचदिवसीय त्योहार है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्योहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाए जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है।
दीपावली पूजन की सामग्री
कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली। कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन।

पूजन शुरू करने से पहले गणेश लक्ष्मी के विराजने के स्थान पर रंगोली बनाएं। जिस चौकी पर पूजन कर रहे हैं उसके चारों कोने पर एक-एक दीपक जलाएं। इसके बाद प्रतिमा स्थापित करने वाले स्थान पर कच्चे चावल रखें फिर गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा को विराजमान करें। इस दिन लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबेर, सरस्वती एवं काली माता की पूजा का भी विधान है अगर इनकी मूर्ति हो तो उन्हें भी पूजन स्थल पर विराजमान करें। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा के बिना देवी लक्ष्मी की पूजा अधूरी रहती है। इसलिए भगवान विष्ण के बांयी ओर रखकर देवी लक्ष्मी की पूजा करें।

दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए


Monday, 16 October 2017

धनतेरस पूजा की समाग्री और पूजन विधि



                                       


धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और सेहत की रक्षा और आरोग्य के लिए धन्वन्तरी देव की उपासना की जाती है. इस दिन यमराज की भी पूजा होती है. पूरे साल में यह अकेला ऐसा दिन है, जिस दिन यमराज की पूजा की जाती है और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है.
इस दिन विशेष विधि से धनतेरस की पूजा करने वाले लोगों को जीवनभर धन की कमी नहीं होती और मान व सम्मान बना रहता है.
पूजन की सामग्री
21 पूरे कमल बीज, मणि पत्थर के 5 प्रकार, 5 सुपारी, लक्ष्मीगणेश के सिक्के (10 ग्राम या अधिक), अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद, कपूर आदि
पूजन विधि
- संध्याकाल में उत्तर की ओर कुबेर तथा धन्वन्तरी की स्थापना करें.
- दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जलाएं.
- कुबेर को सफेद मिठाई और धन्वन्तरि को पीली मिठाई चढ़ाएं.
- पहले "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें.
- फिर "धन्वन्तरि स्तोत्र" का पाठ करें.
- धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है.
- भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी के दीप जलाएं. धुप जलाकर उनकी पूजा करें. भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं. प्रसाद ग्रहण करें
- पूजा के बाद, दीपावली पर, कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.
यम का दीप भी जलाएं
- घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीपक ना निकालें. दीपक जलाने से पहले उसकी पूजा करें.
- किसी लकड़ी के बेंच पर या जमीन पर तख्त रखकर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनायें.
- फिर एक मिट्टी के चौमुखी दीपक या आटे से बने चौमुखी दीप को उस पर रखें.
- दीप के आसपास तीन बार गंगा जल का छिड़काव करें.
- दीप पर रोली का तिलक लगाएं. उसके बाद तिलक पर चावल रखें.
- दीप पर थोड़े फूल चढ़ाएं.
- दीप में थोड़ी चीनी डालें.
- इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीप में डालें.
- परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं.
- दीप को प्रणाम करें.
- दीप को घर के गेट के पास रखें. उसे दाहिने तरफ रखें और यह सुनिश्चित करें की दीप की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो.
- चूंकि यह दीपक मृत्यु के नियन्त्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो.


दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए


 

Thursday, 12 October 2017

चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत

                                                                            
चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपवली का त्यौहार अमावस की रात में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से जोड़ लेता है और फिर राम से शिकायत करता है और राम भी उस की बात से सहमत हो कर उसे वरदान दे बैठते हैं आइये देखते हैं ।
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जब चाँद का धीरज छूट गया ।
वह रघुनन्दन से रूठ गया ।
बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है ।
स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है ।

तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है ।
हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है ।
सीता के रूप को हम ही ने सँभारा है ।
चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है ।

जिस वक़्त याद में सीता की ,
तुम चुपके - चुपके रोते थे ।
उस वक़्त तुम्हारे संग में बस ,
हम ही जागते होते थे ।

संजीवनी लाऊंगा ,
लखन को बचाऊंगा ,.
हनुमान ने तुम्हे कर तो दिया आश्वश्त
मगर अपनी चांदनी बिखरा कर,
मार्ग मैंने ही किया था प्रशस्त ।
तुमने हनुमान को गले से लगाया ।
मगर हमारा कहीं नाम भी न आया ।

रावण की मृत्यु से मैं भी प्रसन्न था ।
तुम्हारी विजय से प्रफुल्लित मन था ।
मैंने भी आकाश से था पृथ्वी पर झाँका ।
गगन के सितारों को करीने से टांका ।

सभी ने तुम्हारा विजयोत्सव मनाया।
सारे नगर को दुल्हन सा सजाया ।
इस अवसर पर तुमने सभी को बुलाया ।
बताओ मुझे फिर क्यों तुमने भुलाया ।
क्यों तुमने अपना विजयोत्सव
अमावस्या की रात को मनाया ?

अगर तुम अपना उत्सव किसी और दिन मानते ।
आधे अधूरे ही सही हम भी शामिल हो जाते ।
मुझे सताते हैं , चिड़ाते हैं लोग ।
आज भी दिवाली अमावस में ही मनाते हैं लोग ।

तो राम ने कहा, क्यों व्यर्थ में घबराता है ?
जो कुछ खोता है वही तो पाता है ।
जा तुझे अब लोग न सतायेंगे ।
आज से सब तेरा मान ही बढाएंगे ।
जो मुझे राम कहते थे वही ,
आज से रामचंद्र कह कर बुलायेंगे

दीपावली पर पटाखे क्यों चलाने चाहिए?,